➤ शिमला के चौड़ा मैदान में पेंशनरों का जोरदार प्रदर्शन, सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
➤ ग्रेच्युटी, लीव इनकैशमेंट, डीए और एरियर भुगतान न होने पर फूटा गुस्सा
➤ मांगें पूरी न होने पर सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने की चेतावनी
शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सोमवार को पेंशनरों का गुस्सा खुलकर सड़कों पर दिखाई दिया। अपनी लंबित वित्तीय देनदारियों के भुगतान की मांग को लेकर हिमाचल प्रदेश पेंशनर्ज संयुक्त संघर्ष समिति ने चौड़ा मैदान में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान पेंशनरों ने आरोप लगाया कि सुक्खू सरकार पिछले तीन वर्षों से रिटायर्ड कर्मचारियों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। उन्होंने कहा कि 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए पेंशनरों को अब तक उनकी ग्रेच्युटी और लीव इनकैशमेंट का भुगतान नहीं किया गया है। इससे हजारों पेंशनर आर्थिक और मानसिक परेशानी से गुजर रहे हैं।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार ने अब तक 13 प्रतिशत डीए और 44 महीने के एरियर का भुगतान भी लंबित रखा हुआ है। इसके अलावा कई पेंशनरों के करोड़ों रुपए के चिकित्सा बिल भी पिछले तीन वर्षों से अटके पड़े हैं, जिससे बुजुर्ग पेंशनरों में भारी नाराजगी है।
धरने के दौरान वक्ताओं ने कहा कि जिन कर्मचारियों ने अपना पूरा जीवन सरकारी सेवा में दिया, आज वही लोग अपने ही हक के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। उन्होंने इसे सरकार की वित्तीय नीतियों की विफलता और पेंशनरों की अनदेखी करार दिया।
पेंशनरों ने सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी लंबित देनदारियों का जल्द भुगतान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर सरकार ने समय रहते उनके अधिकार नहीं दिए, तो वे आने वाले समय में सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए व्यापक जनआंदोलन खड़ा करेंगे।
चौड़ा मैदान में हुए इस प्रदर्शन ने राजधानी में राजनीतिक हलचल भी तेज कर दी है। पेंशनरों के तेवरों को देखते हुए आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।



